इस दुनियाँ में नाना प्रकार के शराबी पाए जाते हैं। कुछ बहुत बड़े, कुछ छोटे, कुछ कमीने और कुछ शरीफ। चलिए ज़रा इनको समझने की कोशिश की जाये।
शरीफ शराबी - ये वो शराबी हैं जो १-२ बोतल बियर में ही टाइट हो जाते हैं, लेकिन चुकीं ये शरीफ होते हैं इसलिए ये पार्टियों में, बिल का बराबर हिस्सा देते हैं। कुछ कमीने शराबी इनका गलत फायदा भी उठाते हैं। इसीलिए ये ज़्यादा बहार नहीं पीते। आखिर उनका तो हमेशा कटता ही रहता है। इनमें पीने की ज़्यादा क्षमता नहीं होती इसलिए ये अपने को छोटा महसूस करते हैं। कमीने शराबियों के साथ इनकी frequency match नहीं होती। चुकीं इनको ज़्यादा चढ़ती नहीं है ये लोग होश में ही रहते हैं। शराब को ये सिर्फ नाम के लिए पीते हैं ताकि लोग इनको भी social समझे। ये लोग ज़्यादा पीना तो चाहते हैं पर बीबी का डर, या सेहत उनको पीने नहीं देती। ये चखना ज़्यादा खाते हैं और दारु कम पीते हैं। कभी कभी बिल का पैसा वसूलने के लिए ये काफी ज़्यादा चखना खा जाते हैं। ये दारु के साथ चखना नहीं, पर चखने के साथ दारु पीते हैं।
कमीने शराबी - ये वो लोग हैं जो पार्टी में ओल्ड मोंक लेके जाते हैं पर host की सिंगल माल्ट whiskey पे टूट पड़ते हैं। इनको लगता है की ये लोग बहुत स्मार्ट हैं क्योंकि ये ज़्यादा पीने की क्षमता रखते हैं। मुफ्त की दारु देख के ये अपने आपको रोक नहीं पाते, चाहे भले ही वो हज़म न हो। ये हमेशा शरीफ शराबियों को साथ ले जाना चाहते हैं ताकि इनका बिल बट जाये और साथ ही साथ वो उनको बता सके की ये उनसे पद में ऊँचे हैं। ये दारु पी के अपने पुराने काण्ड बार बार सुनाते हैं। इनका बस एक ही मकसद होता है - किसी भी पार्टी में सबसे ज़्यादा पीने का। अगर ये वो ना कर पाए तो उनको लगता है की उनकी बेइज़्ज़ती हो गयी है। ये कभी दारु के ना नहीं कहते। ये अगर बीमार भी होते हैं तो भी १-२ पेग मार ही लेते हैं। जो इनसे कम पीते हैं ये उनको तुच्छ इंसान समझते हैं। लेकिन अगर कोई इनसे ज़्यादा पी ले तो इनको डिप्रेशन हो जाता है।
डरपोक शराबी - ये वो शराबी हैं जो डर डर के पीते हैं। इनको कभी बीबी का डर सताता है तो कभी पुलिस का, कभी सास का तो कभी माँ बाप का। ये लोग वैसे तो आमतौर पे कम पीते हैं पर जब बीबी मायके जाती है तो ये १-२ महीने का कोटा एक दिन में पी लेते हैं। उसके बाद ये सालो साल नज़र नहीं आते। इनका मन तो करता है पर इनका डर इनकी इच्छाओं से ज़्यादा ताकतवर होता है। खासकर कमीने शराबी इनका बहुत मज़ाक उड़ाते हैं पर ये ज़्यादा बुरा नहीं मानते। ये अपने आप को शरीफ शराबी समझते हैं पर दोनों में फ़र्क़ होता है। इनकी तुलना दिन भर बंधे हुए कुत्तो से की जा सकती है जो खुलने के बाद इधर उधर दौड़ते फिरते हैं। फिर एक ही दिन में इतनी पी लेते हैं की फिर कई दिनों तक उनके पीने की हिम्मत नहीं होती। लेकिन जब बीबी या डर का कारण कुछ दिनों के लिए दूर हो जाए तो ये कमीने शराबियों के भी बाप हो जाते हैं।
मुफ्तखोर शराबी - ये वो शराबी है जो पीते तो हैं पर उसके लिए पैसे ख़र्च करने में विश्वास नहीं रखते। ये पीने के बाद बहुत दिनों तक नज़र नहीं आते। वैसे तो जहाँ पार्टी होती है तो ये पहुंच जाते हैं पर जब इनका नंबर आता है तो ये लापता हो जाते हैं। ग्रुप में भी ये पैसे देने से कतराते हैं। ज़्यादा तर ग्रुप में ये दूसरो को कहते हैं की मेरा पैसा भी दे दो मैं बाद में दे दूंगा। लेकिन वो दिन कभी नहीं आता। इस वजह से लोग ऐसे शराबियों से दूर ही रहते हैं। इनके बारे में और लिखना खुद की बेइज़्ज़ती है।
नोट: ये ब्लॉग टीचर्स के तीन पेग पी के लिखा गया है, और मैं अपने आपको कमीने शराबी की श्रेढ़ी में मानता हूँ।